Judgment-Analysis

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का सिद्धांत: अब्दुल नासिर बनाम केरल राज्य एवं अन्य (07/01/2025)

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: अब्दुल नासिर बनाम केरल राज्य एवं अन्य
(Criminal Appeal No(s). 1122-1123 of 2018)

निर्णय तिथि: 07 जनवरी, 2025
पीठ: न्यायमूर्ति बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता

भूमिका

उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत इस आपराधिक अपील में अभियुक्त अब्दुल नासिर को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 302 (हत्या) एवं धारा 376 (बलात्कार) के अंतर्गत दोषी ठहराया गया था।

निचली अदालत ने अभियुक्त को मृत्युदंड तथा सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे केरल उच्च न्यायालय द्वारा भी पुष्टि की गई। अपील लंबित रहने के दौरान अभियुक्त का देहावसान हो गया, जिससे मृत्यु दंड निष्पादन का प्रश्न निरर्थक हो गया। तथापि, मृतक अभियुक्त के कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 394(2) के अंतर्गत अपील जारी रखने हेतु आवेदन किया गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार किया।

प्रकरण के महत्वपूर्ण तथ्य एवं परिस्थितियाँ

न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का गहन विश्लेषण करते हुए निम्नलिखित परिस्थितियों को अभियुक्त के दोषसिद्धि की पुष्टि हेतु निर्णायक माना:

  1. अंतिम बार अभियुक्त के परिवार के साथ देखे जाने की घटना:
    पीड़िता, जो अभियुक्त की पुत्री की मित्र थी, घटना के दिन उसके साथ मदरसा जाने हेतु निकली थी, परंतु वहां नहीं पहुंची।
  2. शव की बरामदगी:
    अभियुक्त के घर में तलाशी के दौरान, बाथरूम में कपड़ों के ढेर के नीचे पीड़िता का शव छिपा हुआ पाया गया।
  3. चिकित्सकीय एवं फॉरेंसिक साक्ष्य:
    • शव परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के शरीर पर 37 पूर्व मृत्यु चोटें पाई गईं तथा मृत्यु का कारण गला दबाकर हत्या (manual compression & ligature strangulation) बताया गया।
    • पीड़िता के कपड़ों (MO-7, MO-8, MO-9) एवं घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों पर अभियुक्त का डीएनए एवं मनुष्य के शुक्राणु पाए गए।
    • घटनास्थल से प्राप्त बालों का मिलान पीड़िता के बालों से किया गया, जो वैज्ञानिक रूप से पुष्ट हुआ।
  4. संदिग्ध गतिविधियाँ एवं अभियुक्त का आचरण:
    • अभियुक्त के घर की सेप्टिक टंकी की दो स्लैब हटी हुई पाई गईं, जिससे छिपाने के प्रयास का संकेत मिलता है।
    • घटना के तुरंत बाद अभियुक्त के घर में तलाशी के बावजूद शव नहीं मिला, जो यह दर्शाता है कि इसे कुशलतापूर्वक छुपाया गया था।

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का सिद्धांत

सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि हेतु निम्नलिखित शर्तों का अनुपालन आवश्यक है:

  1. प्रत्येक परिस्थिति का स्वतंत्र रूप से सुस्पष्ट एवं संदेह से परे सिद्ध होना चाहिए।
  2. सभी परिस्थितियाँ आपस में इस प्रकार जुड़ी होनी चाहिएं कि वे अभियुक्त की दोषसिद्धि के अतिरिक्त किसी अन्य निष्कर्ष की संभावना को समाप्त कर दें।
  3. साक्ष्यों का संपूर्ण विश्लेषण अभियुक्त के विरुद्ध एक ठोस एवं अपराजेय श्रृंखला स्थापित करे।

न्यायालय का निष्कर्ष

उपलब्ध साक्ष्यों एवं परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह निष्कर्ष निकाला कि अभियुक्त अब्दुल नासिर द्वारा पीड़िता के साथ जबरन एवं क्रूर यौन शोषण किया गया एवं तत्पश्चात उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई

हालांकि, अभियुक्त की मृत्यु हो जाने के कारण मृत्युदंड निष्पादन का प्रश्न निरर्थक हो गया, तथापि न्यायालय ने अपील खारिज करते हुए अभियुक्त की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

न्यायालय का आदेश

1. अभियुक्त अब्दुल नासिर की दोषसिद्धि यथावत रखी जाती है।
2. अपील निरस्त की जाती है।

संदर्भ:

  • अब्दुल नासिर बनाम केरल राज्य एवं अन्य, [2025] 2 S.C.R. 1 : 2025 INSC 35

शरद बिरधीचंद सारदा बनाम महाराष्ट्र राज्य [1985] 1 एससीआर 88: (1984) 4 एससीसी 116 – पर भरोसा किया गया।

राहुल बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली) [2022] 9 एससीआर 1129: (2023) 1 एससीसी 83; प्रकाश निशाद @ केवट ज़िनक निषाद बनाम महाराष्ट्र राज्य [2023] 8 एससीआर 152: 2023 एससीसी ऑनलाइन एससी 666; हनुमंत बनाम मध्य प्रदेश राज्य [1952] 1 एससीआर 1091: (1952) 2 एससीसी 71; रामेश्वर दयाल और अन्य बनाम यूपी राज्य। [1978] 3 एससीआर 59 : (1978) 2 एससीसी 518; जॉर्ज एवं अन्य बनाम केरल राज्य एवं अन्य [1998] 2 एससीआर 303: (1998) 4 एससीसी 605 – संदर्भित।


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