आचार्य विश्वनाथ और काव्य का स्वरूप (साहित्यदर्पणः, 1384 ईस्वी) आचार्य विश्वनाथ चक्रवर्ती ने अपने ग्रंथ साहित्यदर्पण (Sahitya Darpan) में काव्य के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा—“वाक्यं रसात्मकं काव्यम्”, अर्थात् जो वाक्य…
प्राचीन वैदिक नगर: गया का धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
Date: 10th March 2025 प्राचीन वैदिक नगर गया गया, जिसे ऋग्वेद में ‘किकट राज्य’ के रूप में उल्लिखित किया गया है, एक प्राचीन वैदिक नगर है जो वर्तमान में बिहार…
भगवद्गीता: एक सैन्य निर्देशिका और योद्धाओं की प्रेरणा
Date: 9th March 2025 भगवद्गीता: एक अनूठी सैन्य निर्देशिका भगवद्गीता एक अनुपम सैन्य निर्देशिका (Military Guidelines) है। यह एक क्षत्रिय (श्रीकृष्ण) द्वारा दूसरे क्षत्रिय (अर्जुन) को युद्ध क्षेत्र में सफलता…
भगवान वर्धमान महावीर: जीवन एवं उपदेश (भद्रबाहु कृत कल्पसूत्र के आधार पर)
भगवान महावीर का जीवन त्याग, तपस्या और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। भद्रबाहु द्वारा रचित कल्पसूत्र महावीर के संपूर्ण जीवन का प्रमाणिक दस्तावेज है। उन्होंने जिस जैन दर्शन की स्थापना की,…
वर्तमान दलित: वैदिक ऋषियों की संतान और सनातन धर्म के अभिन्न अंग
25th February 2025 दलित शब्द का वास्तविक अर्थ, उसकी उत्पत्ति और भारत में अस्पृश्यता की ऐतिहासिक सच्चाई भूमिका भारत का वैदिक समाज (Vedic society) अत्यंत उन्नत, संतुलित और आध्यात्मिक मूल्यों…
महर्षि अगस्त्य: वेदों के ऋषि और तमिल भाषा के जनक
ऋषि अगस्त्य भारतीय सनातन परंपरा के महानतम संतों में से एक माने जाते हैं। वे सप्तर्षियों में से एक थे और भारतीय संस्कृति, धर्म, भाषा, साहित्य, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और…
ऋषि नारद द्वारा वाल्मीकि 6 काण्डम् रामायण के संक्षिप्त सार का वर्णन
वाल्मीकि रामायण के इस सारांश को ऋषि नारद ने महर्षि वाल्मीकि को सुनाया था, जिससे प्रेरित होकर वाल्मीकि ने स्वयं रामायण की रचना की। यह महाकाव्य केवल एक ऐतिहासिक या…
नेहरू परिवार का उद्गम: एक ऐतिहासिक यात्रा
काश्मीर से दिल्ली और इलाहाबाद तक की अनूठी गाथा मुगल काल में नेहरू परिवार की दिल्ली यात्रा 18वीं शताब्दी के प्रारंभ में, जब मुगल साम्राज्य का पतन हो रहा था और फर्रुखसियर दिल्ली…
