आचार्य विश्वनाथ और काव्य का स्वरूप (साहित्यदर्पणः, 1384 ईस्वी) आचार्य विश्वनाथ चक्रवर्ती ने अपने ग्रंथ साहित्यदर्पण (Sahitya Darpan) में काव्य के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा—“वाक्यं रसात्मकं काव्यम्”, अर्थात् जो वाक्य…
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आचार्य विश्वनाथ और काव्य का स्वरूप (साहित्यदर्पणः, 1384 ईस्वी) आचार्य विश्वनाथ चक्रवर्ती ने अपने ग्रंथ साहित्यदर्पण (Sahitya Darpan) में काव्य के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा—“वाक्यं रसात्मकं काव्यम्”, अर्थात् जो वाक्य…