नीचे प्रस्तुत किया गया विस्तृत लेख “राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति ढांचा” पर आधारित है, जो भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित है। यह लेख नीति के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करता है और उसकी आलोचनात्मक समीक्षा प्रस्तुत करता है।
Government of India
Ministry of Agriculture & Farmers’ Welfare,
Department of Agriculture & Farmers’ Welfare
राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति: एक आलोचनात्मक विश्लेषण
भूमिका
भारत कृषि प्रधान देश है, जहाँ किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कृषि उत्पादन के बढ़ते स्तरों के बावजूद, किसानों की आमदनी में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण प्रभावी और पारदर्शी विपणन तंत्र का अभाव है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने “राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति ढांचा” (National Policy Framework on Agricultural Marketing) प्रस्तावित किया है, जिसका उद्देश्य एक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और कुशल कृषि विपणन तंत्र विकसित करना है। इस लेख में, हम इस नीति का विस्तृत विश्लेषण करेंगे और इसकी प्रमुख कमियों की भी चर्चा करेंगे।
नीति का उद्देश्य एवं प्रमुख बिंदु
राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति निम्नलिखित प्रमुख लक्ष्यों पर केंद्रित है:
- कृषि बाजार संरचना का आधुनिकीकरण
- एपीएमसी (APMC) को और अधिक प्रतिस्पर्धी एवं कुशल बनाना
- निजी कृषि बाजारों को बढ़ावा देना
- किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत करना
- एकीकृत राष्ट्रीय बाजार (Unified National Market) का निर्माण
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को अपनाना
- इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (eNAM) को और विस्तारित करना
- राज्यों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करना
- कृषि मूल्य शृंखला (Agri-Value Chain) को विकसित करना
- भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयों का विकास
- किसान-उपभोक्ता बाजारों (Farmer-Consumer Markets) को बढ़ावा देना
- किसानों के लिए विपणन में आसानी (Ease of Doing Agri-Trade)
- कृषि व्यापार से जुड़े लाइसेंसिंग और पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाना
- बाजार शुल्क और अन्य लेवी को युक्तिसंगत बनाना
- किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना
- मूल्य स्थिरता और जोख़िम न्यूनीकरण
- संविदा खेती (Contract Farming) को बढ़ावा देना
- मूल्य बीमा (Price Insurance) जैसी योजनाओं को लागू करना
नीति की प्रमुख उपलब्धियाँ और सकारात्मक पहलू
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की अवधारणा
- ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का समावेश किया गया है।
- किसानों को पारदर्शी बाजार सूचना उपलब्ध कराने के लिए ई-नाम (eNAM) को और मजबूत किया गया है।
- ग्रामीण हाटों (GrAMs) को विकसित करने की योजना
- गाँवों में स्थानीय बाजारों को आधुनिक कृषि विपणन केंद्रों (CACMP) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।
- इससे छोटे और सीमांत किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना
- निजी कृषि बाजारों, डिजिटल व्यापार प्लेटफार्मों और निजी कोल्ड स्टोरेज को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।
- इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को अधिक विकल्प मिलेंगे।
- कृषि विपणन को अधिक पेशेवर बनाना
- राज्यों के कृषि विपणन बोर्डों को अधिक कुशल बनाने के लिए नीतिगत सुधार प्रस्तावित किए गए हैं।
- एपीएमसी को एक सेवा-उन्मुख (service-oriented) संस्था के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
नीति की आलोचनात्मक समीक्षा और चुनौतियाँ
- एपीएमसी सुधारों में अस्पष्टता
- नीति में एपीएमसी मंडियों को मजबूत करने की बात की गई है, लेकिन राज्यों को इसके लिए स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं दिया गया है।
- निजी बाजारों और एपीएमसी के बीच संतुलन बनाए रखने की कोई ठोस रणनीति नहीं दी गई है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर संदेह
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है, लेकिन इससे छोटे किसानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
- संविदा खेती (Contract Farming) और निजी व्यापार प्लेटफॉर्म छोटे किसानों को बड़ी कंपनियों की दया पर निर्भर बना सकते हैं।
- डिजिटलीकरण की व्यवहार्यता पर प्रश्न
- भारत के ग्रामीण इलाकों में अभी भी डिजिटल अवसंरचना कमजोर है।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी, किसानों की डिजिटल साक्षरता और ई-नाम जैसे प्लेटफार्मों की पहुंच को लेकर बड़ी चुनौतियाँ हैं।
- विपणन शुल्क और कराधान प्रणाली में जटिलता
- नीति में मंडी शुल्क को 1-2% तक सीमित करने की बात की गई है, लेकिन राज्यों के लिए इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा।
- राज्यों को अपने राजस्व की भरपाई के लिए वैकल्पिक उपायों की आवश्यकता होगी।
- संवेदनशील कृषि उपजों के लिए संरक्षण की कमी
- नीति में मूल्य स्थिरता के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है।
- किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली को इस नीति के साथ कैसे जोड़ा जाएगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई है।
निष्कर्ष एवं सुझाव
राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति सही दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कई सुधारों की आवश्यकता है। निम्नलिखित सुझाव इस नीति को और प्रभावी बना सकते हैं:
- राज्यों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश:
- एपीएमसी सुधारों को लागू करने के लिए राज्यों को चरणबद्ध दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए।
- निजी और सार्वजनिक बाजार संरचना के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश:
- ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और किसानों की डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएँ लागू की जानी चाहिए।
- ई-नाम और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों को सभी राज्यों में समान रूप से विस्तारित किया जाना चाहिए।
- किसानों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम:
- संविदा खेती में किसानों को अनुचित शर्तों से बचाने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए।
- छोटे और सीमांत किसानों को एफपीओ और सहकारी समितियों के माध्यम से सशक्त किया जाना चाहिए।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के साथ तालमेल:
- एमएसपी प्रणाली को इस नीति के साथ समन्वयित किया जाना चाहिए ताकि किसानों को उचित कीमत मिल सके।
- निगरानी और क्रियान्वयन की प्रभावी व्यवस्था:
- इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित की जानी चाहिए।
- राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए एक रेटिंग प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।
अंततः, यह नीति कृषि विपणन प्रणाली को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों के हितों की रक्षा के लिए समुचित सुधार आवश्यक हैं।
Date: 23/02/2025
F.No. 25011 /01/2024-M.II/NPAM(C.No.146364)
Government of India
Ministry of Agriculture & Farmers’ Welfare,
Department of Agriculture & Farmers’ Welfare
(Agriculture Marketing Division)
“F” Wing, Shastri Bhawan, New Delhi
Dated: the 25th November, 2024
OFFICE MEMORANDUM
Sub: Draft “National Policy Framework on Agricultural Marketing – public comments /suggestions regarding.
Department of Agriculture and Farmers’ Welfare (DA&FW), Ministry of Agriculture and FW, Govt. of India on 25th June, 2024 constituted a Drafting Committee under the chairmanship of Shri Faiz Ahmed Kidwai, IAS, Additional Secretary (Marketing), DA&FW. The Drafting Committee has prepared a draft “National Policy Framework on Agricultural Marketing”
Draft “National Policy Framework on Agricultural Marketing
