बाजार सहभागियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर, दिशानिर्देशों के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है और भारतीय रिजर्व बैंक (सरकारी प्रतिभूतियों में वायदा अनुबंध) दिशानिर्देश, 2025 जारी किए जा रहे हैं। राजपत्र अधिसूचना (एस.ओ. 2192 (ई) दिनांक 8 जनवरी 2010) में आवश्यक संशोधन राजपत्र आईडी संख्या के माध्यम से आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किए गए हैं। सीजी-एमएच-ई-13022025-260991 दिनांक 13 फरवरी 2025 (Reserve Bank of India Act, 1934)
RESERVE BANK OF INDIA
FINANCIAL MARKETS REGULATION DEPARTMENT
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MUMBAI 400 001
Notification No. FMRD.DIRD.17/14.03.042/2024-25 dated February 21, 2025
Reserve Bank of India (Forward Contracts in Government Securities) Directions, 2025
सरकारी प्रतिभूतियों में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट पर दिशा-निर्देश 2025
परिचय
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 21 फरवरी 2025 को एक अधिसूचना जारी करते हुए सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित दिशा-निर्देश 2025 प्रकाशित किए हैं। यह दिशा-निर्देश भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45W के अंतर्गत जारी किए गए हैं। इस लेख में, हम इन दिशा-निर्देशों का विस्तार से अध्ययन करेंगे और भारतीय वित्तीय बाजारों पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करेंगे।
1. क्या है सरकारी प्रतिभूतियों में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट?
सरकारी प्रतिभूतियों में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट एक प्रकार का रुपये आधारित ब्याज दर डेरिवेटिव होता है, जिसमें खरीदार और विक्रेता किसी निश्चित तिथि पर एक पूर्व निर्धारित मूल्य पर सरकारी प्रतिभूति के लेन-देन के लिए सहमत होते हैं।
मुख्य घटक:
- बॉन्ड फॉरवर्ड: एक अनुबंध जिसमें भविष्य में सरकारी प्रतिभूति को एक निश्चित मूल्य पर खरीदने/बेचने की सहमति होती है।
- कैश सेटलमेंट: इस स्थिति में, बॉन्ड की भौतिक अदला-बदली के बजाय नकद राशि का लेन-देन होता है।
- फिजिकल सेटलमेंट: इसमें प्रतिभूति की वास्तविक डिलीवरी की जाती है।
- कवर्ड शॉर्ट: जब विक्रेता के पास समान मात्रा की सरकारी प्रतिभूति मौजूद हो।
- अनकवर्ड शॉर्ट: जब विक्रेता के पास अनुबंधित प्रतिभूति नहीं होती।
2. कौन कर सकता है फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट का लेन-देन?
(A) पात्र भागीदार
निम्नलिखित इकाइयाँ सरकारी प्रतिभूतियों में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट कर सकती हैं:
- भारत में स्थित निवासी संस्थाएँ
- अनिवासी (Non-resident) निवेशक, जिन्हें विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनुमति है।
(B) बाज़ार निर्माता और उपयोगकर्ता
बाजार निर्माता (Market-makers):
- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (छोटे वित्त बैंक, भुगतान बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को छोड़कर)।
- स्टैंडअलोन प्राइमरी डीलर (SPD)।
उपयोगकर्ता (Users):
- केवल वे गैर-खुदरा उपयोगकर्ता, जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट किया गया है।
3. बाजार तंत्र और सेटलमेंट प्रक्रिया
(A) लेन-देन की प्रक्रिया
- फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट ओवर-द-काउंटर (OTC) मार्केट में होगा।
- यह इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (ETP) के माध्यम से भी किया जा सकता है।
- सभी लेन-देन का डेटा व्यापार रिपॉजिटरी (TR) को रिपोर्ट किया जाएगा।
(B) सेटलमेंट प्रक्रिया
- फिजिकल सेटलमेंट: विक्रेता, खरीदार को सरकारी प्रतिभूति की वास्तविक डिलीवरी देगा।
- कैश सेटलमेंट: तयशुदा तिथि पर खरीदार और विक्रेता के बीच नकद भुगतान किया जाएगा।
- अनवाइंडिंग: प्रतिभूति धारक अपने अनुबंध को पहले ही समाप्त कर सकता है या इसे किसी अन्य पात्र बाजार प्रतिभागी को सौंप सकता है।
4. सरकारी प्रतिभूतियों में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट का महत्व
(A) वित्तीय बाजारों के लिए प्रभाव
✅ तरलता (Liquidity) में वृद्धि – यह वित्तीय बाजारों में सरकारी प्रतिभूतियों की तरलता को बढ़ाएगा।
✅ जोखिम प्रबंधन – बाजार प्रतिभागियों को ब्याज दर जोखिम से बचने में मदद करेगा।
✅ शॉर्ट सेलिंग का नियंत्रण – अनकवर्ड शॉर्ट पोजिशन पर कड़े नियम लागू होंगे, जिससे बाजार में अधिक स्थिरता बनी रहेगी।
(B) निवेशकों के लिए लाभ
🔹 निवेशकों को हेजिंग (Hedging) की सुविधा मिलेगी।
🔹 ब्याज दर में उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होगा।
🔹 विदेशी निवेशकों को भारतीय बांड बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे।
5. रिपोर्टिंग और अनुपालन
(A) रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ
- बाजार निर्माताओं (Market-makers) को सभी लेन-देन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित ट्रेड रिपॉजिटरी (TR) में रिपोर्ट करना अनिवार्य है।
- नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरंतर ऑडिट किया जाएगा।
(B) आरबीआई की शक्तियाँ
भारतीय रिज़र्व बैंक को किसी भी व्यक्ति या संस्था से जानकारी माँगने और उसके संचालन की समीक्षा करने का अधिकार होगा।
6. नियमों का उल्लंघन होने पर दंड
यदि कोई संस्था इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है, तो भारतीय रिज़र्व बैंक निम्नलिखित दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है:
- संबंधित संस्था को बॉन्ड फॉरवर्ड लेन-देन करने से एक माह तक प्रतिबंधित किया जा सकता है।
- सार्वजनिक हित में उल्लंघन की सूचना सार्वजनिक की जा सकती है।
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए ये दिशा-निर्देश भारत में सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाएंगे। इससे न केवल बाजार की तरलता (Liquidity) बढ़ेगी, बल्कि निवेशकों को जोखिम प्रबंधन (Risk Management) के लिए बेहतर विकल्प भी मिलेंगे।
✅ महत्वपूर्ण बिंदु:
- ये नियम 2 मई 2025 से प्रभावी होंगे।
- सभी प्रतिभागियों को आरबीआई, FEMA और अन्य प्रासंगिक विनियमों का पालन करना होगा।
- बाजार निर्माताओं को मजबूत जोखिम प्रबंधन प्रणाली अपनानी होगी।
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🔹 बॉन्ड फॉरवर्ड मार्केट इंडिया
🔹 फाइनेंशियल मार्केट रेगुलेशन आरबीआई
🔹 आरबीआई का नया नियम 2025
यह लेख वित्तीय जागरूकता बढ़ाने और निवेशकों को नवीनतम नियमों से अवगत कराने के उद्देश्य से लिखा गया है।🚀
