मई में हुए सबसे बड़े भारत-पाक हवाई संघर्ष के तीन महीने बाद दोनों देशों के दावे टकराए, एयर चीफ से लेकर रक्षा मंत्री तक एक-दूसरे को झूठा बता रहे हैं
मई 7 से 10 के बीच हुए भारत-पाकिस्तान के दशकों के सबसे भीषण हवाई संघर्ष के तीन महीने बाद अब यह विवाद फिर से तेज हो गया है कि किसने किसका विमान गिराया। बेंगलुरु में एक कार्यक्रम (09 अगस्त, 2025) में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने दावा किया कि भारत-पाक टकराव में भारत ने पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान और एक बड़ा सैन्य विमान, जो संभवतः निगरानी विमान था, मार गिराया। उनका कहना था कि यह हमला लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर हुआ और इनमें से अधिकांश को रूसी-निर्मित एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ने निशाना बनाया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डेटा को इन दावों का सबूत बताया और यह भी कहा कि पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत में दो एयरबेस पर खड़े “कुछ एफ-16” और एक अन्य निगरानी विमान पर भी हमले हुए। सिंह ने इस कार्रवाई को “अब तक की सबसे बड़ी सतह से हवा में मार करने वाली सफलता” बताया।
इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि ये “बेहूदे” और “हास्यास्पद” दावे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने एक भी पाकिस्तानी विमान को नहीं गिराया, जबकि पाकिस्तान ने छह भारतीय लड़ाकू विमान, एस-400 एयर डिफेंस बैटरी और कई ड्रोन तबाह किए, साथ ही कई भारतीय एयरबेस को भी निष्क्रिय कर दिया। आसिफ ने चुनौती दी कि दोनों देश अपने विमान बेड़े की स्वतंत्र जांच कराएं, जिससे सच सामने आ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के “झूठे और हास्यास्पद” बयान परमाणु हथियारों से लैस क्षेत्र में गंभीर रणनीतिक गलतफहमी पैदा कर सकते हैं।
पूर्व पाकिस्तानी राजदूत डॉ. मलीहा लोधी ने भी भारतीय एयर चीफ के दावे का मजाक उड़ाते हुए कहा कि “उन्हें यह गिनने में कई महीने लग गए कि कितने विमान गिरे।”
भारतीय कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “आज की जानकारी के बाद हमारा सवाल है—जब हमारे पास इतनी मज़बूत सेना थी और हम आगे बढ़ रहे थे, तब किसके दबाव में आपने ऑपरेशन सिंदूर को रोका?” उनका यह बयान सीधे तौर पर मोदी सरकार के फैसलों पर सवाल उठाता है और उस समय की राजनीतिक इच्छा-शक्ति पर बहस को और हवा देता है।
अमेरिकी दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने कहा कि सच चाहे जो हो, इन दावों का समय, जब अमेरिका-भारत रिश्ते संकट में हैं, समझ में आता है। फ्रांस के एयर चीफ जनरल जेरोम बेलांगर ने पहले ही तीन भारतीय विमानों (जिसमें एक रफाल भी शामिल है) के गिराए जाने का सबूत देखने का दावा किया था। द वॉशिंगटन पोस्ट की विजुअल एनालिसिस पर आधारित रिपोर्ट में भी कम से कम दो फ्रांसीसी निर्मित भारतीय रफाल विमानों को पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की पुष्टि की गई थी।
इंडोनेशिया में भारत के रक्षा अटैचे, भारतीय नौसेना के कैप्टन शिव कुमार ने एक सेमिनार में स्वीकार किया कि पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के “कड़े राजनीतिक आदेश” के कारण भारतीय पायलट पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों या एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना नहीं बना सके। यह कदम परमाणु वातावरण में संघर्ष को बढ़ने से रोकने के लिए उठाया गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस एक घंटे लंबे हवाई संघर्ष में भारतीय रफाल को पाकिस्तान के चीनी निर्मित जे-10 लड़ाकू विमानों ने पीएल-15 मिसाइल से निशाना बनाया। यह मिसाइल लगभग 200 किलोमीटर से दागी गई थी, जो अब तक के सबसे लंबी दूरी के हवाई-से-हवाई हमलों में से एक है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि खुफिया विफलता के चलते पायलटों को लगा कि वे मिसाइल की मारक सीमा (150 किमी) से बाहर हैं, लेकिन असलियत में वे उसकी चपेट में थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने भारतीय पायलटों को भ्रमित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक का इस्तेमाल किया, हालांकि भारतीय पक्ष इस दावे को खारिज करता है।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक हमले के बाद शुरू हुई, जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान पर बिना सबूत आरोप लगाए। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के एयरबेस पर जवाबी हमले किए, और अंततः 10 मई को अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद संघर्ष विराम हुआ।
अब, तीन महीने बाद, दोनों देशों के राजनीतिक और सैन्य हलकों में यह बहस और तेज हो गई है कि मई की उस भिड़ंत में सचमुच किसका विमान किसने गिराया — या फिर असली जंग सिर्फ दावों और जवाबी दावों में ही लड़ी जा रही है।
August 10, 2025
