Election Commission doubles remuneration of booth level officers; Remuneration of BLO supervisors increased

चुनाव आयोग ने बढ़ाया बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) का मानदेय

2025 में लोकतंत्र के सच्चे सिपाहियों को चुनाव आयोग का बड़ा तोहफ़ा, BLO को अब मिलेगा ₹12,000 और सुपरवाइज़र को ₹18,000 सालाना मानदेय

02 अगस्त 2025 को भारत के चुनाव आयोग ने लोकतंत्र को मज़बूती देने वाले जमीनी स्तर के कर्मियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसरों (BLOs) के वार्षिक मानदेय को दोगुना कर ₹6000 से बढ़ाकर ₹12,000 कर दिया है। साथ ही मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए BLOs को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को भी ₹1000 से बढ़ाकर ₹2000 किया गया है। यह बदलाव 2015 के बाद पहली बार हुआ है, जिससे यह साफ़ होता है कि आयोग अब इन कर्मियों के योगदान को आर्थिक रूप से भी गंभीरता से ले रहा है।

BLO सुपरवाइज़रों का मानदेय ₹12,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया गया है। यह वे अधिकारी होते हैं जो BLOs के कार्यों की निगरानी करते हैं और संपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं। इनकी भूमिका केवल पर्यवेक्षण तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार करवाने जैसे अनेक ज़िम्मेदार कार्यों में BLOs का मार्गदर्शन करते हैं।

इस निर्णय की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि पहली बार EROs (Electoral Registration Officers) और AEROs (Assistant EROs) को भी मानदेय देने की घोषणा की गई है। अब ERO को ₹30,000 और AERO को ₹25,000 का वार्षिक मानदेय मिलेगा। यह दोनों अधिकारी मतदाता सूची की समग्र प्रक्रिया के शीर्ष प्रशासनिक ज़िम्मेदार होते हैं, और इनके कार्य की गुणवत्ता लोकतंत्र की बुनियाद को सीधा प्रभावित करती है।

इतना ही नहीं, आयोग ने बिहार से शुरू हो रहे Special Intensive Revision (SIR) के अंतर्गत BLOs को ₹6,000 का विशेष प्रोत्साहन देने का भी निर्णय लिया है। यह अभियान निर्वाचन सूचियों की व्यापक और गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक BLO को अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर नामांकन और सत्यापन का कार्य करना होता है।

चुनाव आयोग का यह निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह उन जमीनी कार्यकर्ताओं के परिश्रम और समर्पण को महत्व देता है जो हर चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में अपना संपूर्ण समय और श्रम समर्पित करते हैं। लोकतंत्र केवल मतपत्र और मशीनों से नहीं चलता, वह उन लोगों के कंधों पर टिका होता है जो मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध रखते हैं — और अब उन्हें उनकी मेहनत का उचित आर्थिक सम्मान भी मिलने लगा है।

इस प्रकार यह निर्णय न केवल एक प्रशासनिक सुधार है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी है: आपका परिश्रम देखा भी जा रहा है और उसका मूल्य भी तय किया जा रहा है।

03 अगस्त 2025


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