मुख्य बिंदु:
- अमेरिका में इंग्लिश को आधिकारिक भाषा घोषित करने का कार्यकारी आदेश जारी
- राष्ट्रीय एकता और सरकारी प्रक्रियाओं में सामंजस्य लाने की दलील
- अंग्रेजी सीखने को नया नागरिक बनने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया
- पूर्व कार्यकारी आदेश 13166 को निरस्त किया गया
वॉशिंगटन डी.सी., 2 मार्च 2025
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 1 मार्च 2025 को एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर इंग्लिश को संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक भाषा (official language) घोषित कर दिया। इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना, सरकारी संचार में स्पष्टता लाना और नए नागरिकों को मुख्यधारा में शामिल करने में मदद करना बताया गया है।
राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अमेरिका के ऐतिहासिक दस्तावेज, संविधान और स्वतंत्रता की घोषणा (Declaration of Independence), अंग्रेजी में लिखे गए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देश की नींव इस भाषा पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि “एक साझा भाषा से नागरिकों के बीच आपसी संवाद को बढ़ावा मिलेगा और देश की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना को मजबूत किया जा सकेगा।”
इंग्लिश भाषा की अनिवार्यता पर जोर
इस कार्यकारी आदेश के तहत अमेरिका में सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी संचार में अंग्रेजी का प्राथमिक रूप से उपयोग किया जाएगा। हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी एजेंसी को अन्य भाषाओं में सेवाएं रोकने की अनिवार्यता नहीं होगी, बल्कि वे अपने कार्यों को स्वायत्त रूप से जारी रख सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका बहुभाषी नागरिकों की परंपरा को मान्यता देता है, लेकिन नई नीति के तहत नए नागरिकों को अंग्रेजी भाषा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वे आर्थिक अवसरों, सामुदायिक भागीदारी और राष्ट्रीय पहचान को मजबूती प्रदान कर सकें।
पुराने कार्यकारी आदेश को किया निरस्त
इस आदेश के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति द्वारा 11 अगस्त 2000 को जारी कार्यकारी आदेश 13166 को निरस्त कर दिया गया है, जो उन लोगों को सेवाएं प्रदान करने पर केंद्रित था जिनकी अंग्रेजी दक्षता सीमित थी। हालांकि, नए आदेश में एजेंसियों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे अपने संसाधनों और जरूरतों के आधार पर गैर-अंग्रेजी सेवाएं जारी रख सकते हैं।
विपक्ष और समर्थन की प्रतिक्रियाएं
इस आदेश पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने इसे राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम बताया है, जबकि कुछ समूहों ने इसे अल्पसंख्यकों और अप्रवासियों के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है।
अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह भाषायी विविधता और बहुसंस्कृतिवाद के मूल्यों के खिलाफ जा सकता है। दूसरी ओर, इस निर्णय के समर्थकों का मानना है कि यह संचार को सरल बनाएगा और नागरिकों को अधिक समावेशी बनाएगा।
आगे की राह
राष्ट्रपति के इस निर्णय के प्रभाव आने वाले महीनों में देखने को मिलेंगे। सरकारी एजेंसियां अब इस नीति को लागू करने के लिए अपनी योजनाएं तैयार करेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि विभिन्न राज्य और संघीय एजेंसियां इस आदेश का पालन कैसे करती हैं और क्या इस पर कोई कानूनी चुनौती दी जाती है।
विकासशील अपडेट्स के लिए बने रहें।
