बीते 24 घंटों में 119 शव और 866 घायल ग़ाज़ा के अस्पतालों में पहुँचे; अल-अक्सा पर अतिवादी मंत्री की यात्रा से क्षेत्रीय शांति को खतरा
ग़ाज़ा की धरती पर मौत का साया दिन-ब-दिन गहरा होता जा रहा है। ग़ाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बीते 24 घंटों में 119 शव और 866 घायल लोग अस्पतालों में पहुँचाए गए, जिनमें से कम से कम 15 शव मलबे के नीचे से निकाले गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से 65 फिलिस्तीनी उन हालातों में मारे गए जब वे सहायता प्राप्त करने का प्रयास कर रहे थे, और 511 अन्य घायल हुए।
7 अक्टूबर 2023 से अब तक इज़राइली हमलों में 60,839 लोगों की जान जा चुकी है और 1,49,588 घायल हुए हैं। 18 मार्च 2024 को जब इज़राइल ने हमास के साथ हुए युद्धविराम का उल्लंघन किया, तब से लेकर अब तक कम से कम 9,350 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 37,547 घायल हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने न्यायिक समिति द्वारा सत्यापित किए गए आँकड़ों के आधार पर मृतकों की कुल संख्या में 290 लोगों को और जोड़ा है।
इस त्रासदी के बीच, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रेड क्रॉस से अपील की है कि वे ग़ाज़ा में बंधक बनाए गए इज़राइली नागरिकों तक भोजन और चिकित्सा सहायता पहुँचाने में मदद करें।
दूसरी ओर, बेल्जियम की वायुसेना ने जॉर्डन के सहयोग से ग़ाज़ा में मानवीय सहायता सामग्री गिराई है, परंतु ज़मीनी सच्चाई यह है कि यह सहायता अक्सर ज़रूरतमंदों तक पहुँचने से पहले ही हिंसा, लूट और अराजकता का शिकार बन जाती है। अल ज़वाईदा में, लोगों ने भूख से बेहाल होकर हवाई जहाज से गिरी खाद्य सामग्री पर टूट पड़ने की कोशिश की, जहां धूल और भीड़ में नंगे हाथों, पत्थरों और चाकुओं से संघर्ष देखा गया।
स्थानीय निवासी आमिर ज़क़ूत ने बताया, “भूख ने लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ कर दिया है। लोग खाने के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं।” ग़ाज़ा की गलियों में हर दिन भूखे और कुपोषित लोग भोजन की एक बूँद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सहायता के लिए आने वाले ट्रकों के पीछे हजारों लोग टूट पड़ते हैं, जहाँ कभी-कभी अफरातफरी और हिंसा की घटनाएँ भी घटती हैं।
ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 175 लोगों की भूख से मृत्यु हो चुकी है, जिनमें 93 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। सहायता की भारी कमी के कारण लोग अपने परिवारों का पेट भरने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
इज़राइल द्वारा 2 मार्च से ग़ाज़ा में सभी सहायता को बंद कर देने के बाद से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक भुखमरी से 175 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें 93 बच्चे शामिल हैं। अमेरिकी और इज़राइली समर्थन प्राप्त GHF समूह के माध्यम से राहत वितरण का प्रयास विवादों में आ गया है। इसके वितरण केंद्रों पर सहायता लेने पहुँचे करीब 1,400 फिलिस्तीनियों की गोलीबारी में मौत हो चुकी है।
इसी बीच, इज़राइली दूर-दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन-गवीर द्वारा अल-अक्सा मस्जिद परिसर में की गई यात्रा ने नई चिंता को जन्म दिया है। हमास ने इस यात्रा को क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए “सीधा खतरा” बताया है। जॉर्डन ने इस घटना को “अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन” करार दिया है। अल-क़ुद्स में पवित्र स्थलों की संरक्षकता का दायित्व निभाने वाले जॉर्डन ने इज़राइल से इन उकसाऊ कार्रवाइयों को तत्काल रोकने की माँग की है।
बेन-गवीर द्वारा यह यात्रा ऐसे समय में की गई जब यहूदी समुदाय तिशा बे’आव नामक उपवास का पालन कर रहा था — एक ऐसा दिन जो प्राचीन यहूदी मंदिरों के विनाश का शोक मनाने हेतु निर्धारित है। वक्फ़ संस्था ने बताया कि बेन-गवीर समेत 1,250 लोगों ने उस परिसर में प्रवेश किया और कुछ ने वहाँ नारेबाज़ी, नृत्य और प्रार्थना की। मंत्री ने इस यात्रा को “हमास पर विजय और बंधकों की वापसी” हेतु ईश्वर से याचना बताया।
इस पूरे परिप्रेक्ष्य में ग़ाज़ा में मानवीय संकट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आधुनिक युग की वह जीवंत त्रासदी बन चुका है, जहाँ भूख, हिंसा, राजनीति और आस्था की लड़ाई में निर्दोष नागरिक, विशेषकर बच्चे, बलि चढ़ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और निष्क्रियता भी अब उस अपराध का एक मौन भागीदार बनती प्रतीत हो रही है।
August 3, 2025
