राष्ट्र-विरोधी ताकतें, जो हमारे प्रजातांत्रिक मूल्यों पर कुठाराघात करती हैं, संविधान की आत्मा को धूमिल करना चाहती हैं और हमारी संस्थाओं को बदनाम करती हैं—जब वे हमारे मूल आधार पर प्रहार करती हैं, तो उनका प्रतिघात आवश्यक है। यह हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
धर्म परिवर्तन के माध्यम से जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की साजिश पर भी जताई गहरी चिंता
छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र, 22 फरवरी 2025 – भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज अवैध प्रवासियों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हमारे देश में लाखों ऐसे लोग रह रहे हैं, जिन्हें यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है। वे न केवल रह रहे हैं बल्कि आजीविका भी कमा रहे हैं, हमारे संसाधनों—शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास—पर दबाव डाल रहे हैं। अब यह मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि वे हमारे लोकतांत्रिक प्रणाली में हस्तक्षेप कर निर्णायक खिलाड़ी बनते जा रहे हैं।”
उपराष्ट्रपति डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के 65वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने धर्म परिवर्तन के माध्यम से देश की जनसंख्या संरचना को प्रभावित करने की साजिश पर भी चेतावनी दी।
धर्म परिवर्तन के पीछे गहरी साजिश: उपराष्ट्रपति
श्री धनखड़ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था चुनने का अधिकार है, लेकिन जब यह प्रलोभन, लालच और भय के माध्यम से किया जाता है और इसका उद्देश्य देश की जनसंख्या को बदलकर वर्चस्व स्थापित करना होता है, तो यह खतरनाक हो जाता है।
उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है कि कुछ देशों की मूल पहचान को इस तरह की साजिशों ने समाप्त कर दिया। वहाँ की बहुसंख्यक आबादी विलुप्त हो गई। हमें इस जनसांख्यिकीय हमले की अनुमति नहीं देनी चाहिए। यदि यह सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है, तो हमें सतर्क रहना होगा।”
हर व्यक्ति का अधिकार है कि वह जिस धर्म का चाहे पालन करे, अपनी इच्छा से कोई भी धर्म अपनाए। लेकिन जब लालच देकर, लोभ देकर—by allurement, by temptation—धर्मांतरण होता है, और उसका उद्देश्य यह होता है कि we will get supremacy by changing the demography of the Nation,
चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप और संस्थानों को बदनाम करने की साजिश
उपराष्ट्रपति ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “हाल ही में विश्वसनीय रूप से यह उजागर हुआ है कि हमारे चुनावों को हेरफेर करने, प्रभावित करने का प्रयास किया गया।”
उन्होंने इस पर गहरी और सूक्ष्म स्तर की जांच की मांग करते हुए कहा, “मैं संबंधित संगठनों से अपील करता हूँ कि इस पर गहन, व्यापक और माइक्रो-स्तर की जांच होनी चाहिए। हमें हर उस व्यक्ति को बेनकाब करना होगा, जो इस खतरनाक साजिश में शामिल है और हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।”
इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय संस्थानों को बदनाम करने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और कहा, “व्यवस्थित रूप से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, चुनाव आयोग और न्यायपालिका पर हमला किया जा रहा है। यह वे लोग कर रहे हैं जिनके दिलों में राष्ट्रहित नहीं है।”
मौलिक अधिकार कर्तव्यों के पालन से अर्जित होते हैं
संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों और नागरिक कर्तव्यों पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए हैं, लेकिन इन्हें प्राप्त करने का मार्ग तब मिलता है जब हम अपने मौलिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें।”
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे संस्थानों की जवाबदेही तय करें और सरकारी अधिकारियों से सवाल पूछें कि “क्या वे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं?”
सामाजिक सद्भाव से आएगा राष्ट्रीय परिवर्तन
श्री धनखड़ ने सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, “हमें सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता देनी होगी। सामाजिक सद्भाव हमारी एकता में विविधता को परिभाषित करेगा। इससे जाति, धर्म और अन्य विभाजनकारी तत्व एकजुटता के प्रतीक में बदल जाएंगे।”
उन्होंने नागरिकों से पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखने और बड़ों, माता-पिता और पड़ोसियों का सम्मान करने की अपील की।
भारत की सांस्कृतिक विरासत: आध्यात्मिकता और नैतिकता हमारी पहचान
भारत की प्राचीन सभ्यता पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “हम स्वभाव से भौतिकवादी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, धार्मिक और नैतिक रूप से समृद्ध लोग हैं। हम दुनिया के लिए एक आदर्श हैं और यह हजारों वर्षों से चल रहा है।”
उन्होंने नागरिकों को राष्ट्रभक्ति को मजबूत करने और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रयास
पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि “जलवायु परिवर्तन हमारे अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। हमें इस पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।”
प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “अगर हम इस अभियान को ईमानदारी से अपनाते हैं, तो यह एक बड़ा बदलाव ला सकता है।”
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा, “हर देश ताकतवर तभी बनता है जब वह आत्मनिर्भर हो। हमें ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाना होगा।”
समारोह में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, राज्यसभा सांसद डॉ. भागवत कराड, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय फुलारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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