मोदी के बेंगलुरु दावों के बावजूद भारत की असली प्रगति पर सवाल

सरकारी आँकड़े और भाषण अक्सर कागज़ी उपलब्धियों का महिमामंडन करते हैं, जबकि आम नागरिक की ज़िंदगी में इनका ठोस असर सीमित है।