सुप्रीम कोर्ट ने 2031 के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति लगभग तय की

सुप्रीम कोर्ट ने 2031 के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति लगभग तय की

सिफारिश करने का अधिकार तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश का, लेकिन कॉलेजियम के फैसले से उठे सवाल

नई दिल्ली, 9 मार्च 2025: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक असामान्य कदम उठाते हुए 2031 के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लगभग नियुक्त कर दिया है। यह निर्णय तब लिया गया है, जबकि परंपरागत रूप से मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश का अधिकार उस समय के मौजूदा CJI का होता है।

6 मार्च 2025 को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Collegium) ने सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए वरिष्ठता, योग्यता और ईमानदारी जैसे कारकों पर विचार किया। इस प्रक्रिया के तहत, कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जॉयमल्या बागची को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की। न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की 25 मई 2031 को सेवानिवृत्ति के बाद, न्यायमूर्ति बागची भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद ग्रहण करेंगे और 2 अक्टूबर 2031 को अपनी सेवानिवृत्ति तक इस पद पर रहेंगे।

क्या यह कॉलेजियम की सीमाओं का अतिक्रमण है?

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम की जिम्मेदारी होती है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पारंपरिक रूप से मौजूदा CJI द्वारा की जाती है। ऐसे में 2031 के CJI की नियुक्ति का पहले से ही संकेत दिया जाना न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े करता है।

जस्टिस जॉयमल्या बागची को 27 जून 2011 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में नियुक्त किया गया था। उन्हें 4 जनवरी 2021 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया, लेकिन कुछ ही महीनों बाद 8 नवंबर 2021 को फिर से कलकत्ता उच्च न्यायालय में भेज दिया गया। उन्होंने 13 वर्षों से अधिक समय तक उच्च न्यायालय में सेवा दी है। कॉलेजियम ने यह भी ध्यान में रखा कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कलकत्ता उच्च न्यायालय से केवल एक ही न्यायाधीश हैं।

क्या यह न्यायिक इतिहास में एक नई परंपरा बनेगी?

यह उल्लेखनीय है कि 2013 में न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की सेवानिवृत्ति के बाद से अब तक कलकत्ता उच्च न्यायालय से कोई भी मुख्य न्यायाधीश नहीं बना है। हालांकि न्यायमूर्ति बागची की नियुक्ति से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को बल मिलेगा, लेकिन इतनी पहले से CJI तय करने का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया की स्वायत्तता पर असर डाल सकता है।

इस निर्णय के साथ, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक नई मिसाल कायम कर दी है, जिससे भविष्य में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर बहस छिड़ सकती है।


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