जादवपुर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को बड़ा झटका: ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ का दर्जा हुआ रद्द

बजट कटौती, राजनीतिक विवाद और शैक्षणिक संकट के बीच यूजीसी का सख्त फैसला

कोलकाता, 12 मार्च 2025: भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) को बड़ा झटका लगा है। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने एम्पावर्ड एक्सपर्ट्स कमेटी (EEC) की सिफारिश पर विश्वविद्यालय का ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (IoE)’ का दर्जा खत्म कर दिया है।

इस फैसले के पीछे मुख्य कारण विश्वविद्यालय का बजटीय प्रस्ताव में भारी गिरावट बताई गई है। प्रारंभिक अनुमानित बजट ₹3,299 करोड़ से घटकर ₹606 करोड़ हो जाने के कारण EEC ने इसे IoE मानकों के अनुरूप नहीं पाया

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) की प्रतिष्ठा को धक्का लगने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उदासीनता के कारण विश्वविद्यालय इस सम्मानजनक दर्जे से वंचित हुआ।

बीजेपी सांसद सामिक भट्टाचार्य ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा,
“केंद्र सरकार विश्वविद्यालय को ₹1,000 करोड़ तक की सहायता देने के लिए तैयार थी, लेकिन राज्य सरकार ने अपनी वित्तीय भागीदारी से हाथ खींच लिया। पहले JU का बजट ₹1,015 करोड़ किया गया और फिर ₹606 करोड़ तक घटा दिया गया, जिससे विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक 25% राशि खुद जुटाना अनिवार्य हो गया। यह स्थिति IoE प्रस्ताव को कमजोर करने वाली साबित हुई।”

वित्तीय संकट और बढ़ता असंतोष

पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि JU की वित्तीय स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने सही निर्णय नहीं लिया

लेकिन समस्या सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक भी है। हाल के महीनों में जादवपुर विश्वविद्यालय राजनीतिक विरोध, छात्रों के प्रदर्शनों और विवादास्पद ग्राफिटी के कारण चर्चा में रहा है।

विशेष रूप से ‘आज़ाद कश्मीर’ और ‘फ्री पैलेस्टाइन’ जैसे नारों के साथ किए गए भित्तिचित्रों (Graffiti) ने विवाद को और बढ़ा दिया। इसके अलावा, विश्वविद्यालय परिसर में हुए प्रदर्शनों के दौरान पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु की कार पर हमला और उनके काफिले के खिलाफ हिंसा के मामले ने JU की छवि को नुकसान पहुंचाया।

शिक्षा पर वामपंथी छात्र आंदोलनों का असर

जादवपुर विश्वविद्यालय में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और अकादमिक गतिविधियों के ठप पड़ने को भी एक बड़ी समस्या के रूप में देखा जा रहा है।

  • हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय में पढ़ाई से अधिक राजनीति हावी हो गई है, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ है।
  • कुछ शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि “अर्बन नक्सलवाद” के प्रभाव के कारण विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता कमजोर हो रही है

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विश्वविद्यालय में बार-बार हो रहे छात्र आंदोलन, प्रशासनिक विफलता और उग्र राजनीतिक विचारधारा ने जादवपुर विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली को गहरे संकट में डाल दिया है

क्या दोबारा मिल सकता है IoE का दर्जा?

राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सामिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय मंत्री से पूछा कि क्या जादवपुर विश्वविद्यालय भविष्य में IoE दर्जे के लिए दोबारा आवेदन कर सकता है?

इसके जवाब में सुकांत मजूमदार ने कहा,
“EEC ने स्पष्ट रूप से बताया कि विश्वविद्यालय का वर्तमान बजट और उसकी स्वायत्तता की स्थिति IoE मानकों के अनुरूप नहीं थी। यदि JU अपने वित्तीय प्रस्ताव को पुनः मजबूत करता है और UGC की अपेक्षाओं को पूरा करता है, तो भविष्य में पुनः आवेदन करने की संभावना हो सकती है।”

“शिक्षा पर राजनीति भारी” – विशेषज्ञों की राय

कई शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने इस फैसले को पश्चिम बंगाल की शिक्षा प्रणाली के लिए गंभीर झटका बताया है।

  • अर्थशास्त्री और शिक्षाविद् पार्थो चक्रवर्ती का कहना है कि,
    “JU को राजनीति का शिकार बनाया गया है। बजटीय कटौती के अलावा, हालिया छात्र विरोधों और प्रशासनिक अस्थिरता ने भी विश्वविद्यालय की साख को प्रभावित किया है।”
  • शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य विश्लेषकों ने हाल के विरोध प्रदर्शनों को “शहरी नक्सलवाद” करार दिया और कहा कि यह संस्थान की अकादमिक उत्कृष्टता को कमजोर करने का एक बड़ा कारण बन रहा है।

बंगाल की शिक्षा नीति पर सवाल

सुकांत मजूमदार ने ममता बनर्जी सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा,
“बंगाल सरकार करोड़ों रुपये मुफ्त योजनाओं और प्रचार अभियानों पर खर्च कर सकती है, लेकिन राज्य के शीर्ष विश्वविद्यालय को बचाने के लिए वित्तीय सहयोग नहीं दे सकती।”

अगला कदम क्या होगा?

जादवपुर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। यदि राज्य सरकार वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाकर एक ठोस प्रस्ताव तैयार करे, तो विश्वविद्यालय दोबारा IoE दर्जा प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकता है।

फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि JU प्रशासन, राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और बंगाल की शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं

🔹 शिक्षा बनाम राजनीति – किसका पलड़ा भारी?
🔹 क्या जादवपुर विश्वविद्यालय अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस पा सकेगा?
🔹 राजनीतिक अस्थिरता और छात्र आंदोलन – JU का भविष्य क्या होगा?

(रिपोर्ट: कोलकाता ब्यूरो, देहाती न्यूज़ नेटवर्क)


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