PM Modi

अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन: मोदी ने मराठी भाषा और संस्कृति का किया गौरव

प्रधानमंत्री मोदी ने मराठी साहित्य की महान विरासत को सराहा, मराठी को ‘अभिजात भाषा’ का दर्जा मिलने पर जताई खुशी

1878 में  पहले आयोजन से लेकर अब तक अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन देश की 147 वर्षों की यात्रा का साक्षी रहा है। महादेव गोविंद रानाडे जी, हरि नारायण आप्टे जी, माधव श्रीहरि अणे जी, शिवराम परांजपे जी, वीर सावरकर जी, देश की कितनी ही महान विभूतियों ने इसकी अध्यक्षता की है। शरद जी के आमंत्रण पर आज मुझे इस गौरवपूर्ण परंपरा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। मैं आप सभी को, देश दुनिया के सभी मराठी प्रेमियों को इस आयोजन की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आणि आज तर जागतिक मातृभाषा दिवस आहे. तुम्ही दिल्लीतील साहित्य सम्मेलनासाठी दिवस सुद्धा अतिशय चांगला निवडला।

नई दिल्ली, 21 फरवरी 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजधानी दिल्ली में अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने मराठी भाषा, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा का गौरवगान किया। प्रधानमंत्री ने मराठी को ‘अभिजात भाषा’ का दर्जा मिलने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि यह करोड़ों मराठी भाषियों के लिए गर्व का विषय है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य तिलक और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसी महान विभूतियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा सिर्फ एक बोली नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की वाहक है।

उन्होंने मराठी साहित्य की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा, “मराठी में भक्ति भी है, शक्ति भी है और युक्ति भी है।” उन्होंने इस अवसर पर मराठी साहित्यकारों से युवा पीढ़ी को साहित्य और मातृभाषा से जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अपनाने का आह्वान किया।

इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. तारा भवालकर, पूर्व अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शोभने, साहित्यकारों, विद्वानों और मराठी भाषा प्रेमियों की उपस्थिति रही।

प्रधानमंत्री ने इस आयोजन को भारत की भाषाई एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव बताया और कहा कि “हमारी भाषाएँ हमारी विरासत हैं, जो पूरे भारत को जोड़ने का कार्य करती हैं।”

आप जानते हैं, भाषा केवल उसके संवाद का माध्यम भर नहीं होती है। हमारी भाषा हमारी संस्कृति की संवाहक होती है। ये बात सही है कि भाषाएँ समाज में जन्म लेती हैं, लेकिन भाषा समाज के निर्माण में उतनी ही अहम भूमिका निभाती है। हमारी मराठी ने महाराष्ट्र और राष्ट्र के कितने ही मनुष्यों के विचारों को अभिव्यक्ति देकर हमारा सांस्कृतिक निर्माण किया है। इसीलिए, समर्थ रामदास जी कहते थे- मराठा तितुका मेळवावा महाराष्ट्र धर्म वाढवावा आहे तितके जतन करावे पुढे आणिक मेळवावे महाराष्ट्र राज्य करावे जिकडे तिकडे मराठी एक सम्पूर्ण भाषा है। इसीलिए, मराठी में शूरता भी है, वीरता भी है। आप देखिए, जब भारत को आध्यात्मिक ऊर्जा की जरूरत हुई, तो महाराष्ट्र के महान संतों ने ऋषियों के ज्ञान को मराठी भाषा में सुलभ कराया। संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत रामदास, संत नामदेव, संत तुकड़ोज़ी महाराज, गाडगे बाबा, गोरा कुम्हार और बहीणाबाई महाराष्ट्र के कितने ही संतों ने भक्ति आंदोलन के जरिए मराठी भाषा में समाज को नई दिशा दिखाई। आधुनिक समय में भी गजानन दिगंबर माडगूलकर और सुधीर फड़के की गीतरामायण ने जो प्रभाव डाला, वो हम सब जानते हैं।

मराठी भाषा और साहित्य के गौरवशाली अतीत को सलाम

प्रधानमंत्री ने इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि मराठी भाषा ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सामाजिक सुधारों तक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने मराठी संतों, योद्धाओं, समाज सुधारकों और साहित्यकारों के योगदान को सराहा और मराठी साहित्य के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में मराठी भाषा प्रेमियों से इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपील की और सभी को इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं।

(अधिक अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें!) 🚀


USA

अमेरिकी संघीय नौकरशाही में कटौती: क्या भारत के लिए भी यह सही रास्ता है?

भारत और यूके के बीच दूरसंचार, एआई और उभरती तकनीकों में सहयोग का विस्तार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *