📅 प्रकाशित तिथि: 24 फरवरी 2025
💬 रिपोर्टर: जैव-प्रौद्योगिकी ने कृषि, मत्स्य पालन और पशु विज्ञान में क्रांति ला दी है। नई तकनीकों जैसे जीनोम एडिटिंग, आणविक प्रजनन (मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग) और जैव-नियंत्रण समाधानों (बायोकंट्रोल सॉल्यूशंस) ने इन क्षेत्रों में उत्पादकता और लचीलेपन को बढ़ावा दिया है। हाल ही में, भारत ने वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। आइए जानें कि कैसे!
🌱 कृषि में जैव-प्रौद्योगिकी की शक्ति
💬 रिपोर्टर: कृषि जैव-प्रौद्योगिकी में जीनोमिक्स, प्रोटीओमिक्स, ट्रांसजेनिक्स और जीन एडिटिंग जैसी नई तकनीकों पर शोध हो रहा है। इसके तहत भारतीय वैज्ञानिकों ने कई अहम उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
🔹 जलवायु-स्मार्ट फसलें:
👉 भारत में हाल ही में एक नई सूखा-सहिष्णु, उच्च उत्पादन वाली चना किस्म “सात्विक (NC9)” विकसित की गई है। इसे फसल मानक केंद्रीय उप-समिति द्वारा स्वीकृति मिल गई है। यह किस्म सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी बेहतर उत्पादन देगी।
🔹 जीनोम एडिटेड फसलें:
👉 वैज्ञानिकों ने भारतीय धान किस्म MTU-1010 में कुछ जीनों को संशोधित किया है, जिससे पैदावार में वृद्धि हुई है।
👉 DEP1 (DENSE ERECT PANICLE) नामक जीन एडिटिंग से विकसित चावल की बालियों में अधिक दाने पाए गए, जिससे कुल उत्पादन बढ़ा।
🔹 डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक:
👉 पहली बार, 90K पैन-जीनोम SNP जीनोटाइपिंग एरे “IndRA” चावल के लिए और “IndCA” चना के लिए विकसित किया गया है।
👉 ये तकनीकें किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली फसल पहचानने और उनकी शुद्धता जांचने में मदद करेंगी।
🔹 अमरंथ आनुवंशिक संसाधन:
👉 अमरंथ जीनोमिक संसाधन डेटाबेस और 64K SNP चिप विकसित की गई है।
👉 शोध से पता चला है कि अमरंथ मोटापे को कम करने में सहायक हो सकता है।
🔹 जैव-नियंत्रण समाधान (Biocontrol Solutions):
👉 वैज्ञानिकों ने एक फंगल एंजाइम नैनो-फॉर्मूलेशन (Myrothecium verrucaria) तैयार किया है, जो टमाटर और अंगूर की फसलों में पाउडरी मिल्ड्यू रोग को नियंत्रित करता है।
🔹 किसान कवच (Kisan Kavach):
👉 यह एक विशेष सुरक्षा सूट है, जो किसानों को कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह कृषि सुरक्षा में एक बड़ी सफलता है।
🐄 पशु जैव-प्रौद्योगिकी में क्रांति
💬 रिपोर्टर: भारत पशुपालन क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जहाँ करोड़ों ग्रामीण किसानों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। पशु जैव-प्रौद्योगिकी में किए गए नवाचारों से पशुओं की सेहत और प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा रहा है।
🔹 पशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण:
👉 नई जैव-प्रौद्योगिकी तकनीकों से गोजातीय (cattle) और भेड़-बकरी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर अनुसंधान किया जा रहा है।
👉 नवीनतम टीकों और जैविक उपचारों (biotherapeutics) से पशुओं को संक्रमण और महामारी से बचाया जा सकता है।
🔹 दुग्ध उत्पादन में वृद्धि:
👉 जीन एडिटिंग तकनीक से अधिक दूध उत्पादन करने वाली नस्लों के विकास पर शोध जारी है।
👉 प्रजनन सुधार कार्यक्रम से देसी नस्लों को अधिक उत्पादनक्षम बनाया जा रहा है।
🐠 जलीय कृषि और समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी
💬 रिपोर्टर: मत्स्य पालन और जलीय कृषि में जैव-प्रौद्योगिकी का उपयोग उत्पादन बढ़ाने और समुद्री संसाधनों का कुशल दोहन करने के लिए किया जा रहा है।
🔹 सस्ता और पोषक तत्वों से भरपूर झींगा आहार (Shrimp Diet):
👉 शोध में पाया गया कि सोयाबीन मील के यीस्ट किण्वन (fermentation) से पोषण अवशोषण बढ़ता है, जिससे झींगा के आहार में इसकी 35% तक मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
🔹 CIFA-Brood-Vac:
👉 एक नई वैक्सीन विकसित की गई है, जो मछलियों के अंडों (फिश स्पॉन) में संक्रमण को रोककर मछली उत्पादन को सुरक्षित बनाती है।
🔹 IFFD (Interactive Fish Feed Designer) V2:
👉 यह एक डिजिटल सॉफ्टवेयर है, जो कम लागत वाली और पौष्टिक मछली आहार बनाने में मदद करता है।
🔍 समापन टिप्पणी
💬 रिपोर्टर: जैव-प्रौद्योगिकी का कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन में प्रभाव अद्वितीय है। इन तकनीकों से
✅ कृषि उत्पादन में वृद्धि हो रही है।
✅ पशुधन और मछली पालन को नई ऊँचाइयाँ मिल रही हैं।
✅ खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित की जा रही है।
🚀 आने वाले वर्षों में, ये नवाचार भारत को वैश्विक कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी बना सकते हैं!
