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भारत-यूके व्यापार वार्ता फिर से शुरू: नई संभावनाओं की ओर बढ़ते कदम

भारत-यूके व्यापार वार्ता फिर से शुरू, व्यापार समझौते की दिशा में अहम कदम

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कीर स्टारमर की पहल से भारत-यूके व्यापार वार्ता को गति
  • दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मिलेगा नया आयाम, व्यापार वार्ता फिर से शुरू

मुख्य बिंदु (Highlights):

✅ भारत और यूके के बीच व्यापार वार्ता फिर से शुरू
✅ जी-20 समिट में पीएम मोदी और यूके पीएम कीर स्टारमर की चर्चा का परिणाम
✅ व्यापार और निवेश में नए अवसरों की संभावना
✅ पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, नवाचार और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूती
✅ निष्पक्ष और संतुलित व्यापार समझौते की दिशा में कदम

नई दिल्ली में भारत-यूके व्यापार वार्ता की आधिकारिक घोषणा

नई दिल्ली, 24 फरवरी 2025: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) की वार्ता को पुनः आरंभ करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह घोषणा भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और यूके के व्यापार एवं व्यवसाय विभाग के सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स द्वारा की गई, जो इस समय नई दिल्ली दौरे पर हैं।

यह महत्वपूर्ण निर्णय भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और यूके के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर के बीच नवंबर 2024 में जी-20 शिखर सम्मेलन (G-20 Summit) के दौरान रियो डी जनेरियो, ब्राज़ील में हुई बैठक का परिणाम है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की थी कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता को जल्द से जल्द फिर से शुरू किया जाना चाहिए।

भारत-यूके के बीच व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती

भारत और यूके के बीच लंबे समय से एक मजबूत व्यापारिक एवं रणनीतिक साझेदारी रही है। दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, जिनमें सुरक्षा और रक्षा, नई एवं उभरती प्रौद्योगिकियां, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार, हरित वित्त (Green Finance) और जनता के बीच संपर्क (People-to-People Contact) शामिल हैं

इस व्यापार वार्ता का लक्ष्य दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करना, व्यापार को सुगम बनाना और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना है। इस समझौते से दोनों देशों की कंपनियों और उपभोक्ताओं को नए अवसर मिलेंगे और द्विपक्षीय संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे।

परस्पर लाभदायक एवं संतुलित व्यापार समझौते की ओर बढ़ते कदम

भारत और यूके ने इस व्यापार वार्ता को निष्पक्ष, संतुलित और भविष्य-दृष्टि से युक्त बनाने का संकल्प लिया है। दोनों देशों के लिए यह समझौता “विन-विन सिचुएशन” साबित हो सकता है क्योंकि भारत और यूके की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं।

दोनों नेताओं ने वार्ता कर रहे अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समझौते से जुड़े शेष मुद्दों का समाधान निकालें और एक निष्पक्ष एवं समतामूलक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दें, जिससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिल सके

व्यापार वार्ता से किन क्षेत्रों को मिलेगा अधिक लाभ?

भारत और यूके के बीच व्यापार समझौता कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आर्थिक अवसर खोलेगा:

1️⃣ मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल: भारत के वस्त्र उद्योग को निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं।
2️⃣ आईटी और टेक्नोलॉजी: भारतीय आईटी कंपनियों को यूके में अधिक एक्सेस मिलेगा।
3️⃣ ग्रीन एनर्जी: सौर एवं पवन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ेगा।
4️⃣ स्वास्थ्य एवं शिक्षा: मेडिकल रिसर्च, हेल्थकेयर और उच्च शिक्षा में नए अवसर खुलेंगे।
5️⃣ फिनटेक और स्टार्टअप: भारतीय स्टार्टअप्स को यूके के बाजार में एंट्री आसान होगी।
6️⃣ पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी: भारत और यूके के बीच पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा।

आगे की राह: व्यापार समझौते के लिए महत्वपूर्ण कदम

भारत और यूके के अधिकारी अब व्यापार वार्ता के लिए निर्धारित ढांचे के अनुसार वार्ता की गति तेज करेंगे। दोनों देशों की सरकारें इस समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना चाहती हैं, ताकि 2025 के अंत तक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकें

यदि यह समझौता सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो यह भारत और यूके के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और दोनों देशों के व्यापार को 50 बिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापार वार्ता की पुनः शुरुआत वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटना है। इससे न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं सशक्त होंगी, बल्कि व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को भी नया आयाम मिलेगा। यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में एक अग्रणी शक्ति बनाने की दिशा में एक और कदम है

👉 अब नज़र इस पर रहेगी कि दोनों देशों के बीच वार्ता कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है और यह समझौता कब तक अंतिम रूप ले पाता है!


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